जांजगीर चाम्पा – श्रीमद्भागवत कथा को अमर कथा माना गया है , यह कथा हमें मुक्ति का मार्ग दिखलाती हैं। जो जीव श्रद्धा और विश्वास के साथ मात्र एक बार इस कथा को श्रवण कर लेता है उनका जीवन सुखमय हो जाता है , वह सदैव के लिये मोक्ष की प्राप्ति कर लेता है और उसे सांसारिक बंधनों के चक्कर मे आना नही पड़ता। इस कलिकाल में मोक्ष दिलाने वाला श्रीमद्भागवत महापुराण कथा से कोई अन्य श्रेष्ठ मार्ग नही है।
उक्त बातें नवागढ़ विकासखण्ड अंतर्गत आने वाले ग्राम नेगुरडीह में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस भागवताचार्य पं० विजय दुबे (कचंदा वाले) ने मुख्य यजमान श्रीमति हेमलता शिवनारायण यादव सहित उपस्थित श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुये कही। महाराजजी ने बताया कि परीक्षित को ऋषि पुत्र द्वारा सातवें दिन मरने का श्राप दिया गया था। उन्होंने अन्य उपाय के बजाए श्रीमद्भागवत की कथा का श्रवण किया और मोक्ष को प्राप्त कर भगवान के बैकुण्ठ धाम को चले गये। ऐसे श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने का सौभाग्य केवल श्रीकृष्ण की असीम कृपा से ही प्राप्त हो सकती है। कथा सुनाने के बाद श्रीशुकदेवजी ने राजा परिक्षित को पूछा राजन मरने से डर लग रहा हैं क्या ? तब राजा ने कहा महाराज मृत्यु तो केवल शरीर की होती हैं आत्मा तो अमर होती हैं , भागवत कथा सुनने के बाद अब मेरा मृत्यु से कोई डर नही हैं औऱ अब मैं भगवत्प्राप्ति करना चाहता हूँ। मुझे कथा श्रवण कराने वाले सुकदेवजी आपकों कोटि-कोटि मेरा प्रणाम कहकर परिक्षित ने श्री शुकदेवजी को विदा किया। इसके बाद तक्षक सर्प आया और राजा परीक्षित के शरीर को डसकर लौट गया। परीक्षित की आत्मा तो पहले ही श्रीकृष्ण की चरणारविन्द में समा चुकी थी और कथा के प्रभाव से अंत में उन्हें मोक्ष प्राप्त हो गया। परीक्षित को जब मोक्ष हुआ तो ब्रह्माजी ने अपने लोक में तराजू के एक पलडे़ में सारे धर्म और दूसरे में श्रीमद्भागवत को रखा तब भागवत का ही पलड़ा भारी रहा , अर्थात श्रीमद्भागवत ही सारे वेद पुराण शास्त्रों का मुकुट है। इधर पिता की मृत्यु को देखकर राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय क्रोधित होकर सर्प नष्ट हेतु आहुतियांँ यज्ञ में डलवाना शुरू कर देते हैं जिनके प्रभाव से संसार के सभी सर्प यज्ञ कुंडों में भस्म होना शुरू हो जाते हैं तब देवता सहित सभी ऋषि मुनि राजा जनमेजय को समझाते हैं और उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। महाराजश्री ने बताया कि इस कलयुग में भी मनुष्य श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर अपना कल्याण कर सकता हैं। इस कलिकाल में भी वह भगवान के नाम स्मरण मात्र से भगवत् शरणागति की प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बना सकता है। उन्होंने बताया कि भागवत कथा हर मनुष्य के भाग्य में नहीं होती है , वे बहुत भाग्यशाली ही होते है जिनके भाग्य में भागवत कथा श्रवण करने का अवसर होता है। देखा जाये तो भागवत कथा कलियुग में साक्षात् भगवान के दर्शन के बराबर होते है। श्रीमद्भागवत कथा के स्मरण करने मात्र से हमारे सभी पाप नष्ट हो जाते है और अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने हेतु देवता गण भी तरसते रहते है। मानव प्राणी को इस कथा का लाभ व आशीर्वाद आसानी से भी मिल सकता है , श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से मानव जीवन का पूरी तरह से कल्याण हो जाता है और उनके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।वहीं इस कथा के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जया भूपेन्द्र यादव ने बताया कि इस भागवत कथा में कथाव्यास ने भागवत महात्म्य , ध्रुव चरित्र , परीक्षित कथा , राजा बलि की कथा , कपिलोपाख्यान , शिव-पार्वती विवाह , प्रहलाद चरित्र , वामन अवतार , रामकथा , कृष्णजन्म , बाल लीला , कृष्ण की रासलीला , गोवर्धन पूजा , महारास एवं रूखमणी मंगल कथा , सुदामा मित्रता की कथा सुनायी। भागवत कथा स्थल में प्रतिदिन प्रसंग के अनुसार भगवान की मनमोहक झाँकी भी निकाली जा रही थी। कथा सुनने के लिये प्रतिदिन गांव सहित आसपास के लोग एवं मीडिया साथी बड़ी संख्या में कथास्थल पहुँचते थे। सभी श्रद्धालुओं ने आरम्भ से लेकर विश्राम दिवस तक मंत्र मुग्ध होकर भक्तिभाव से संकीर्तन करते हुये कथाश्रवण किया। इसी कड़ी में आज बुधवार को गीता पाठ , तुलसी वर्षा , होम- हवन , सहस्त्रधारा के साथ देव विदाई की जायेगी।
