नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील
जांजगीर-चांपा, 3 जुलाई 2026। वर्षा ऋतु के आगमन और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच स्वास्थ्य विभाग ने जिले में संभावित मौसमी संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए एडवाइजरी जारी की है। एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत जिला सर्विलेंस इकाई द्वारा मच्छरजनित एवं जलजनित रोगों की विशेष निगरानी की जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने नागरिकों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि वर्षा ऋतु के दौरान वायरल बुखार, तीव्र अतिसार (दस्त), हैजा, टाइफाइड, पीलिया (हेपेटाइटिस-ए एवं ई), स्क्रब टायफस, लेप्टोस्पायरोसिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया सहित अन्य मौसमी संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जिले के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों को इन बीमारियों की शीघ्र पहचान, समय पर जांच, उपचार एवं रोकथाम के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से केवल स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने, पानी को उबालकर अथवा शुद्ध करके पीने, भोजन को ढककर रखने तथा ताजा एवं गर्म भोजन का सेवन करने की सलाह दी है। खुले में बिकने वाले कटे फल एवं दूषित खाद्य पदार्थों से बचने, भोजन करने से पहले तथा शौच के बाद साबुन से हाथ धोने और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। विभाग ने मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए घर, आंगन एवं आसपास कहीं भी पानी जमा नहीं होने देने, कूलर, गमले, टायर, टंकियों एवं अन्य जल पात्रों की नियमित सफाई करने तथा पूरी बांह के कपड़े पहनने, मच्छरदानी एवं मच्छररोधी साधनों का उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही घर एवं आसपास साफ-सफाई बनाए रखने और कचरे का उचित निस्तारण करने का भी आग्रह किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, लगातार सिरदर्द, शरीर में दर्द, उल्टी, दस्त, त्वचा पर चकत्ते, पीलापन, अत्यधिक कमजोरी अथवा अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो बिना विलंब निकटतम शासकीय स्वास्थ्य संस्थान में चिकित्सकीय परामर्श लें। स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक की सलाह के अनुसार आवश्यक जांच एवं उपचार कराना अधिक सुरक्षित है। आईडीएसपी के अंतर्गत जिले में मौसमी बीमारियों की सतत निगरानी, रोगों की त्वरित सूचना, आवश्यक जांच, लार्वा सर्वेक्षण, स्रोत नियंत्रण, जनजागरूकता गतिविधियां तथा उपचार संबंधी व्यवस्थाएं नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं।
