June 23, 2026

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वार्षिक कार्ययोजना एवं पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना पर हुई चर्चा

शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल सुविधाओं को मिलेगी प्राथमिकता

जांजगीर-चांपा, 23 जून 2026। जिला खनिज न्यास संस्थान (डीएमएफ) की शासी परिषद की बैठक आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में डीएमएफ अंतर्गत प्राप्त राशि, व्यय, प्रगतिरत कार्यों तथा विभिन्न नए प्रस्तावों सहित कई एजेंडों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना एवं वार्षिक कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। पंचवर्षीय एवं वार्षिक कार्ययोजना के अनुरूप ही बजट राशि का उपयोग किया जाएगा। बैठक में सांसद जांजगीर-चांपा श्रीमती कमलेश जांगड़े, जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप, अकलतरा विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह, जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू, पामगढ़ विधायक श्रीमती शेषराज हरबंश, जिला पंचायत अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी, कलेक्टर  जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय, डीएफओ हिमांशु डोंगरे, जिला पंचायत सीईओ  गोकुल रावटे सहित शासी परिषद के सदस्य एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने कहा कि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत कार्ययोजना तैयार की गई है। पांच वर्षीय निधि आबंटन योजना के अंतर्गत उपलब्ध निधि का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास एवं आजीविका, कृषि, पशुपालन एवं मत्स्यपालन, पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण, दिव्यांगजन एवं वृद्धजन कल्याण, स्वच्छता, आवास, भौतिक अधोसंरचना, सिंचाई, ऊर्जा, जलागम विकास तथा पर्यावरणीय गुणवत्ता संवर्धन के क्षेत्रों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से खनन प्रभावित क्षेत्रों में निजी सहभागिता एवं आंशिक वित्तपोषण के माध्यम से वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही समेकित कार्ययोजना के तहत शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से विकास एवं जनकल्याणकारी कार्य संचालित किए जा रहे हैं। बैठक में जनप्रतिनिधियों एवं सदस्यों ने खनिज प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, अधोसंरचना, कौशल विकास, आजीविका संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डीएमएफ मद से स्वीकृत कार्यों को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध ढंग से पूर्ण कराया जाए। उन्होंने डीएमएफ निधि का उपयोग जिले के समन्वित एवं सतत विकास के लिए किए जाने पर जोर देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, सड़क, पेयजल, शिक्षा गुणवत्ता, प्राथमिक अधोसंरचना तथा अन्य जनहितकारी कार्यों को प्राथमिकता देने के सुझाव दिए, ताकि खनिज प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को अधिकतम लाभ मिल सके।