त्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे डिवीजन में मंगलवार सुबह एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को दहशत और शोक में डूबो दिया।
कोरबा से बिलासपुर की ओर आ रही एक मेमू पैसेंजर ट्रेन ने लाल खदान स्टेशन के पास खड़ी मालगाड़ी से जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मेमू ट्रेन का इंजन और पहला कोच सीधे मालगाड़ी के डिब्बों के ऊपर चढ़ गया।
हादसे के बाद पूरा ट्रैक धातु और मलबे के ढेर में तब्दील हो गया।
टक्कर के बाद मचा हाहाकार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के कुछ सेकंड बाद ही पूरा इलाका यात्रियों की चीख-पुकार से गूंज उठा।
कई यात्री ट्रेन की बोगियों में फंसे रह गए, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए।
रेलवे ट्रैक पर टूटे लोहे के टुकड़े, बिखरा सामान और खून से सना दृश्य बेहद भयावह था।
लोग मदद के लिए दौड़ पड़े और तुरंत प्रशासन को सूचना दी गई।
घायल सिम्स और अपोलो अस्पताल में भर्ती
घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं।
एनडीआरएफ और रेलवे रेस्क्यू टीम ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया।
बोगियों को गैस कटर से काटकर यात्रियों को निकाला जा रहा है।
अब तक दर्जनों घायल यात्रियों को सिम्स मेडिकल कॉलेज और अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रशासन ने गंभीर रूप से घायलों के लिए विशेष मेडिकल टीम तैनात की है।
हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं,
लेकिन सूत्रों के मुताबिक छह यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है,
जबकि कई की हालत नाजुक बताई जा रही है
सिग्नल फेल्योर या सिस्टम गड़बड़ी की आशंका
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि यह हादसा सिग्नल फेल्योर या कम्युनिकेशन एरर की वजह से हुआ हो सकता है।
मेमू ट्रेन को क्लियर सिग्नल कैसे मिला, जबकि मालगाड़ी पहले से ट्रैक पर खड़ी थी —
यह अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, डीआरएम और पुलिस अधीक्षक,
मौके पर मौजूद हैं और उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
रेल प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर रेल प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
स्थानीय यात्रियों और ग्रामीणों ने कहा कि रेलवे सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहा है।
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लोगों का आरोप है कि प्रशासन राजस्व बढ़ाने और माल लदान पर ध्यान दे रहा है,
जबकि सुरक्षा उपकरणों की मॉनिटरिंग और सिग्नल सिस्टम में सुधार पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
एक यात्री ने बताया
अगर ट्रेन को पहले से चेतावनी मिल जाती, तो ये हादसा टल सकता था। कई मिनटों तक किसी ने मदद नहीं की, लोग खुद बोगियों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे।”
जनप्रतिनिधियों ने जताया रोष, मुआवजे की मांग
स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि रेल सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद
ऐसी घटनाएँ यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ हैं।
इस हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए
और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा तथा घायलों को बेहतर इलाज मिलना चाहिए।”
मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका
मौके से मिली जानकारी के अनुसार,
अब तक छह यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
हादसे के समय ट्रेन में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे,
और अभी भी कुछ लोग बोगियों में फंसे होने की आशंका है।
राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी है,
और मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
