17 अप्रैल 2026 / कृषि विभाग द्वारा खरीफ सीजन में उर्वरकों के वितरण में पारदर्शिता लाने और सब्सिडी का लाभ सीधे वास्तविक किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से एग्रीस्टैक योजना के तहत फार्मर आईडी एवं एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। उप संचालक कृषि सक्ती ने जानकारी देते हुए बताया कि अब सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं द्वारा खाद का वितरण एग्रीस्टैक पोर्टल में दर्ज किसानों के रकबे के आधार पर किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि खाद का लाभ केवल पात्र किसानों को ही मिले और किसी प्रकार की अनियमितता न हो। फार्मर आईडी किसानों की एक डिजिटल पहचान है, जो केन्द्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से तैयार की जा रही है। यह आधार कार्ड की तरह एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है, जिसमें किसान का व्यक्तिगत विवरण, बैंक खाते की जानकारी तथा भू-अभिलेख (भुईया पोर्टल के अनुसार भूमि विवरण) लिंक रहता है। शासन द्वारा सभी किसानों को शत-प्रतिशत फार्मर आईडी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों पर नियंत्रण करना, खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाना तथा वास्तविक किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना है। जिन किसानों ने अभी तक फार्मर आईडी नहीं बनवाई है या एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन नहीं कराया है, उन्हें जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए कहा गया है, ताकि उन्हें खाद प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। किसान स्वयं एग्रीस्टैक पोर्टल पर जाकर या नजदीकी सहकारी समिति एवं चॉइस सेंटर में आधार कार्ड, बैंक पासबुक एवं बी-1 (खसरा) दस्तावेज प्रस्तुत कर पंजीयन करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त अधिक जानकारी के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या संबंधित पटवारी से संपर्क किया जा सकता है।
