जांजगीर चांपा 19 जून 2026। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोकुल रावटे के मार्गदर्शन में जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) 2026 को प्रभावी बनाने के लिए कचरे के पृथक्करण एवं वैज्ञानिक निपटान को बढ़ावा दिया जा रहा है। आम नागरिकों को गीला, सूखा, सेनेटरी एवं विशेष कचरे को अलग-अलग डिब्बों में संग्रहित करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान के तहत हरा डिब्बा गीले कचरे जैसे फल एवं सब्जियों के छिलके, बचा हुआ भोजन तथा पत्तियों के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे कम्पोस्ट एवं जैविक खाद तैयार की जा सके। नीला डिब्बा सूखे कचरे जैसे कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच एवं धातु के संग्रहण के लिए उपयोग किया जा रहा है, जिन्हें पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) के माध्यम से दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है। इसी प्रकार लाल डिब्बे में सेनेटरी कचरा जैसे सेनेटरी पैड, डायपर, मास्क एवं बैंडेज का सुरक्षित संग्रहण किया जाता है, जबकि काले डिब्बे में बैटरी, ट्यूबलाइट, एक्सपायरी दवाइयां, पेंट एवं अन्य खतरनाक रसायनों जैसे विशेष कचरे का पृथक संग्रहण किया जाता है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि वे कचरे का स्रोत स्तर पर ही पृथक्करण करें तथा निर्धारित रंग के डिब्बों का उपयोग कर स्वच्छता अभियान को सफल बनाएं। कचरे का सही वर्गीकरण न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा एवं संसाधनों के पुनः उपयोग को भी बढ़ावा देता है। जिला प्रशासन का उद्देश्य जनसहभागिता के माध्यम से स्वच्छ, सुंदर एवं पर्यावरण अनुकूल जिले का निर्माण करना है। इसके लिए ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, शैक्षणिक संस्थानों एवं आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता ही स्वच्छ भारत एवं स्वस्थ समाज की मजबूत नींव है।
