छत्तीसगढ़ के जांजगीर जांपा में एक ऐसा व्यक्ति है, जिसने खुद को मृत घोषित कर दिया और इस व्यक्ति ने एक खास अपील भी की है।
जांजगीर-चांपा जिले में एक अनोखी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है. स्वर्गीय चंद्रमणि के नाम से खुद को ‘मृत’ घोषित कर एक व्यक्ति ने मृत्यु भोज जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किया है, जिसने सभी का ध्यान सबकी तरफ खींचा है।
हाथ में तख्ती और मौन धारण करके की अपील
व्यक्ति की तरफ से बताया गया कि मृत्यु भोज गरीब परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालता है और इस पर रोक लगनी चाहिए. सफेद लिबास में मौन धारण कर वे दिनभर शहर के मुख्य चौक पर खड़े रहे और लोगों से मृत्यु भोज बंद करने की अपील करते रहे. इस दौरान वह हाथ में तख्ती पकड़े रहे, जिस पर लिखा था कि मृत्यु भोज बंद किया जाए. स्वर्गीय चंद्रमणि. फिर उन्होंने तख्ती पर अपना फोन नंबर भी लिख रखा था।
कलेक्टर को भी सौंपा ज्ञापन
इतना ही नहीं उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की. सरकारी दफ्तरों और शहर में घूम-घूमकर वे लोगों को जागरूक कर रहे हैं. उनकी इस अनोखी मुहिम ने शहर में चर्चा का माहौल बना दिया है. कई लोग उनके साहस और सामाजिक सुधार के प्रयास की सराहना कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसे जागरूकता फैलाने का प्रभावी तरीका बता रहे हैं. यह पहल अब जिले में सामाजिक बदलाव की एक नई बहस को जन्म दे रही है।
हिंदू धर्म में मौत के बाद दिया जाता है भोज
हिंदू धर्म में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भोज दिया जाता है, जिसे आमतौर पर तेरहवीं या श्राद्ध भी कहा जाता है. यह एक सामाजिक और धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें परिजनों द्वारा ब्राह्मणों और लोगों को भोजन करवाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि आत्म की शांति के लिए ऐसा किया जाता है. इसी वजह से पिंडदान भी करवाया जाता है।
